हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराना

यह कोई संयोग नहीं है कि भारत में, अनेक पूजा स्थलों और विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के सभी धर्म संस्थानों के बीच, सरकार केवल हिंदू और जैन मंदिरों से ही भेदभाव करती है| यह कोई कम विडंबना नहीं है, कि केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ बहुसंख्यक धार्मिक समुदाय को उसके सबसे मौलिक धार्मिक अधिकार – उसके पूजा स्थल पर अपने स्वयं के अधिकार – से वंचित रखा जाता है |

जबकि सरकार चर्चों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और बौद्ध विहारों के संचालन या धन सम्बंधित विषयों  में हस्तक्षेप नहीं करती है, हिंदू और जैन मंदिरों से सभी मंदिर दान और किराये की आय को उनके संबंधित राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

विभिन्न राज्य सरकारों ने धन के कुप्रबंधन के कथित आरोपों के तहत, अपने संबंधित हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (एच. आर. & सी. ई.) अधिनियमों के माध्यम से भारत भर में सहस्रों हिंदू मंदिरों का वित्तीय और प्रबंधन नियंत्रण ग्रहण किया हुआ है। ऐसा करने से, ये राज्य सरकारें ब्रिटिश राज की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए विचारहीनता से आगे बढ़ रही हैं, जब हिंदू संस्थानों के धन को नियंत्रित करने के लिए इस तरह के अधिनियम बनाये गए गए थे।

यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि हिंदू और जैन संस्थानों को छोड़कर (क्योंकि न्यायिक परिभाषा के अनुसार जैन हिंदू हैं) कोई भी अन्य धार्मिक संस्थाएं, चाहे वो ईसाई, मुस्लिम और सिख धर्मों के अनुयायियों के गिरिजाघर (चर्च),  मस्जिद या गुरुद्वारे हों, उन्हें इसी प्रकार के धन के कुप्रबंधन के आरोपों के बावजूद, समस्त भारत के विभिन्न राज्यों  द्वारा प्रतिपादित एच. आर. & सी. ई. अधिनियमों जैसे किन्हीं अधिनियमों के अन्तर्गत नहीं लाया गया है।

श्री टी. आर. रमेश के विषय में:

इस आंदोलन में आगे आने वाले सर्वप्रमुख व्यक्ति श्री टी.आर.रमेश हैं। वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में “स्वामी दयानंद सरस्वती केस” का प्रतिनिधित्व करते हुए, तमिलनाडु, कर्नाटक और पुडुचेरी में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए लड़ रहे हैं।

श्री रमेश मंदिर प्रशासन में उल्लंघनों और अनियमित प्रथाओं के विरुद्ध एक कठोर प्रचारक हैं। उन्होंने तमिलनाडु में कई मंदिरों में और कई विषयों पर हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (एच. आर. & सी. ई.)  विभाग को आड़े हाथों लिया है|

श्री रमेश 2009 से 2014 तक डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी के सहयोगी दल का भाग थे, जिसने तमिलनाडु में “चिदंबरम मंदिर” को सरकार के चंगुल से मुक्त कराने में सहायता की। उन्होंने वर्ष 2011 में एक बड़े बहुराष्ट्रीय बैंक में अपना अत्यधिक सफल कैरियर छोड़ दिया, और अपना समय और ऊर्जा तमिलनाडु के हिन्दू धर्मार्थ और धार्मिक बंदोबस्त (एच. आर. & सी. ई.) विभाग के विरुद्ध लड़ाई लड़ने के लिए समर्पित कर दिया, तथा सामान्यतः मद्रास उच्च न्यायालय में ही यह लड़ाई लड़ते रहे।

वर्ष 2016 में, श्री रमेश ने श्री जे.साई दीपक को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने वित्तीय सहायता की मांग की थी क्योंकि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। सृजन फाउंडेशन ट्रस्ट आगे आया, और तभी से उनके सभी खर्चों का वहन करने के लिए सहमत हो गया|

सृजन फाउंडेशन ट्रस्ट हिंदू मंदिरों को मुक्त कराने की इस लड़ाई में न केवल श्री रमेश और अन्य लोगों का समर्थन करने के लिए कटिबद्ध है, बल्कि इस योग्य प्रयास हेतु श्री रमेश का समर्थन करने के लिए व्यक्तिगत दानकर्ताओं से भी समर्थन मांगता है। सभी योगदान सीधे चेन्नई में स्थित श्री टी. आर. रमेश के धर्मार्थन्यास को किए जाने चाहिए|

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के इस प्रयास के विषय में अधिक जानने के लिए, कृपया इस वेबसाइट पर जाएँ: https://freehindutemples.org/

मंदिरों पर नियंत्रण हटाने की हमारी इस लड़ाई के विषय में अधिक जानकारी के लिए, कृपया यह वीडियो देखें:


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